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Heat and Temperature Notes in Hindi

Heat and Temperature Heat and Temperature Notes in Hindi – इस पोस्ट में ऊष्मा और ताप से जुड़े सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स जैसे संवेदनशील ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा, ऊष्मीय प्रसार, तापमान मापन, और महत्वपूर्ण प्रश्न सरल भाषा में समझाए गए हैं। यह नोट्स SSC, Railway, REET, UPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बहुत उपयोगी हैं। 📑 Table of Contents ताप क्या है (Temperature) कोई वस्तु कितनी गर्म या ठडी है की माप को ताप कहते है। ताप किसी वस्तु की ऊष्मीय अवस्था का सूचक है। ताप वस्तु का ठण्डी है या गर्म उसका डिग्री माप होता है। ऊष्मा का प्रवाह उच्च ताप से निम्न ताप की ओर होता है। ताप का मापन थर्मामीटर एवं पायरोमीटर द्वारा किया जाता है तापमान क्या होता है (Temperature Measurement) वस्तु के ताप की माप को तापमान कहते है। तापमापी में उपस्थित पारा (द्रव धातु) में ऊष्मीय प्रसार (ऊष्मा पाकर फैलने) का गुण पाया जाता है। पारे के विस्तार (फैलना) तथा संकुचन (सिकुड़ना) के द्वारा ताप को मापा जाता है। जल का हिमांक बिंदु 0°C इसे न्यूनतम बिन्दु भी कहते है। जल का क्वथनांक बिन्दु 100°C इसे उच...

विद्युत आवेश क्या है? सूत्र, मात्रक, प्रकार और पूरी जानकारी

Electric Charge and Electricity Notes in Hindi परिचय: भौतिक विज्ञान में विद्युत (Electricity) और आवेश (Charge) बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक हैं। यह SSC, रेलवे, NTPC, ALP और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है। ⚡ आवेश (Electric Charge) किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण उसमें इलेक्ट्रॉन प्रवाह से विद्युतीय या चुंबकीय गुण आ जाता है, उसे आवेश कहते हैं। इसे q से दर्शाते हैं। 📐 आवेश का सूत्र q = ne q = आवेश n = इलेक्ट्रॉनों की संख्या e = एक इलेक्ट्रॉन का आवेश 📏 मात्रक (Unit) SI मात्रक = कूलम्ब (Coulomb) अन्य मात्रक = फैराडे 1 फैराडे = 96485 कूलम्ब 🔍 महत्वपूर्ण तथ्य एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश = -1.602 × 10 -19 C 1 कूलम्ब में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 6.25 × 10 18 समान आवेश → प्रतिकर्षण असमान आवेश → आकर्षण धनात्मक व ऋणात्मक आवेश की खोज → बेंजामिन फ्रैंकलिन ⚙️ इलेक्ट्रॉन प्रवाह इलेक्ट्रॉन हमेशा ऋणात्मक से धनात्मक की ओर प्रवाहित होते हैं (धारा की विपरीत दिशा में)। Read more :- ध्वनि तरंग सरल भाषा में: प्रकार, लक्षण और उपयोग ...

ध्वनि तरंग सरल भाषा में: प्रकार, लक्षण और उपयोग

ध्वनि तरंगों का सम्पूर्ण अध्ययन : आवृत्ति, प्रकार और उपयोग ध्वनि क्या है इसके प्रकार, लक्षण, माध्यम में चाल, श्रव्य तरंगे, अपश्र्वय तरंगे, पराश्रव्य तरंग आदि के संपूर्ण नोट्स इस ब्लॉग में आपको मिल जाएंगे जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मददगार रहेंगे  अगर नोट्स आपको सही लगते हैं तो इसे अपने अन्य मित्रों के साथ भी शेयर करे  📑 Table of Contents ध्वनि (sound):- ध्वनि एक प्रकार से ऊर्जा का ही रूप है जो कणों के कंपन के कारण उत्पन्न होती है।  ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है इसके संचरण के लिए किसी न किसी माध्यम (ठोस, द्रव, गैस) का होना आवश्यक है तथा माध्यम में प्रत्यास्थता एवं जड़त्व का गुण होना चाहिए। ध्वनि अनुधैर्य तरंग है जो माध्यम में संपीडन व विरलन के रूप में संचरित होती है । संपीडन वाले स्थान पर माध्यम का दाब एवं घनत्व अधिक होता है तथा विरलन में माध्यम का दाब व घनत्व कम होता है। ध्वनि तरंगों की आवर्ती 20 Hz से 20,000 Hz तक होती है। ध्वनि तरंगों का आवर्ती परिसर  ध्वनि तरंगों को आवर्ती के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है  1. श्र...

अग्नाशय ग्रंथि : प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु सम्पूर्ण महत्वपूर्ण तथ्य व सरल नोट्स

  अग्नाशय ग्रन्थि * यह छोटी आंत के ग्रहणी भाग मे स्थित होती है। * यह मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रन्थि है। * यह अन्तस्त्रावी और बहिस्त्रावी दोनों प्रकार की मिश्रित ग्रन्थि है क्योंकि यह एन्जाइम व हार्मोन दोनों का स्त्रावन करती है।  एन्जाइम :- एन्ज़ाइम वे प्रोटीन होते हैं जो शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं (chemical reactions) को तेज़ करते हैं। इन्हें जैव उत्प्रेरक (Biological catalysts) भी कहते हैं। मुख्य बिंदु : • ये भोजन को पचाने में मदद करते हैं। • एन्ज़ाइम बिना बदले प्रतिक्रिया को बार-बार तेज़ कर सकते हैं। • उदाहरण: अमाइलेज (Amylase), लिपेज (Lipase), ट्रिप्सिन (Trypsin)। हार्मोन :- हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक (chemical messengers) होते हैं, जो शरीर की ग्रंथियों (glands) द्वारा बनाए जाते हैं और रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक जाकर उनके कार्यों को नियंत्रित करते हैं। मुख्य बिंदु: • शरीर की वृद्धि, चयापचय (metabolism), भावना, रक्त-शर्करा आदि को नियंत्रित करते हैं। • बहुत कम मात्रा में भी बड़ा प्रभाव डालते हैं। • उदाहरण: इंसुलिन, एड्रेनालिन, थाइरॉक्सिन। Read ...

तंत्रिका तंत्र – समझने में आसान सरल भाषा में

तंत्रिका तंत्र (Nervous System)   तंत्रिका तंत्र:- वह तंत्र जो शरीर के समस्त अंगों एवं कार्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करता है, तंत्रिका तंत्र कहलाता है। न्यूरोन्स (Neurons) - तंत्रिका तंत्र का निर्माण तंत्रिका कोशिकाओं अथवा न्यूरोन्स द्वारा होता है।  न्यूरोन्स, तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। तंत्रिका तंत्र शरीर के विभिन्न अंगो पर कई प्रकार से नियंत्रण करता है, जैसे- a) - यह जन्तु को बाहरी वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया करने में मदद करता है। यह समस्त मानसिक कार्यों का नियंत्रण करता है। b) - यह विभिन्न अंगों की भिन्न-भिन्न क्रियाओं को संचालित एवं नियंत्रित करता है। बहुकोशिकीय जीवों के शरीर में विभिन्न कार्यों का नियंत्रण तथा समन्वय करने के लिए विशिष्ट कोशिकाएं पाई जाती है जिसे तंत्रिकोशिका (Neuron) कहते हैं। यह तंत्रिकातंत्र की रचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। न्यूरोन्स के तीन भाग होते हैं- (i) कोशिकाय (सोमा)- यह कोशिका का प्रमुख भाग होता है। जिसमें एक केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य पाया जाता है।  ( ii) दुमिकाएँ (Dendrites)- ये सूचनाएँ उपार्जित करते हैं...

यकृत (Liver) : प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सरल भाषा में पढ़े

  यकृत (Liver)  * यकृत शरीर का सबसे बड़ा ग्रंथीय अंग है, जो पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में स्थित होता है। इसका मुख्य काम पाचन, चयापचय, रक्त शोधन और ऊर्जा भंडारण को नियंत्रित करना है। * इसका अध्ययन हिपटॉलोजी कहलाता है * इसे शरीर की प्रयोगशाला भी कहते है * यह एक प्रकार की पाचक ग्रंथि है  * इसका प्रमुख कार्य भोजन को ग्लाइकोजन के रूप मे संग्रहित करना है * यह पित्त रस बनाता है तथा पित्त रस को पित्ताशय मे एकत्रित करता है। पित्त पीले रंग का एक क्षारीय द्रव है जिसका pH मान 7.7 है य़ह पित्त रस वसा के अवशोषण मे सहायक है तथा भोजन के साथ आए जीवाणुओं को नष्ट करता है  Read :- अग्नाशय ग्रंथि : प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु सम्पूर्ण महत्वपूर्ण तथ्य व सरल नोट्स * यकृत लाल रक्त कणिकाओ मे उपस्थित हीमोग्लोबिन को नष्ट करके पित्त वर्णको का निर्माण करता है  पित्त वर्णक दो प्रकार के होते है  बिलिरुबिन  बिलिवर्डिन Note :- बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाने पर पीलिया रोग होता है तथा इसी के कारण मल का रंग पीला होता है  * यकृत हिपैरिन नामक पदार्थ का स्त्रावन करता है इसे रक्त प्रतिस्क...

लार (Saliva) और लार ग्रंथियां (Saliva Enzymes)

लार (Saliva) और लार ग्रंथियां (Saliva Enzymes)  यूं तो भोजन का स्वाद और पाचन मुंह से ही शुरू हो जाता है, लेकिन अक्सर हम उस ‘जादुई द्रव्य’ के बारे में सोचना भूल जाते हैं जो इस पूरी प्रक्रिया को संभव बनाता है - वह है हमारी लार (Saliva)। लार न केवल भोजन को निगलने में मदद करती है, बल्कि यह हमारे मौखिक स्वास्थ्य और समग्र पाचन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आइए, इस अद्भुत तरल और इसे बनाने वाली ग्रंथियों के बारे में गहराई से जानें   लार ग्रंथि लार को मेन्डुयूला अब्लोगेटा व पोन्स वैरोलाई ( मस्तिष्क के भाग ) नियंत्रित करते है लार ग्रंथि लाला रस का स्त्रवन करती है  लार ग्रंथि तीन प्रकार की होती है।  कर्ण पुर्व ग्रन्थि ( पैरोटीड ग्लैण्ड)   अधोजंम्भ ग्रन्थि ( सबमेडीबुलर ग्लैण्ड)  अधोजिह्वा ग्रन्थि ( सब लिग्युअल ग्लैण्ड)  1. कर्ण पुर्व ग्रन्थि ( पैरोटीड ग्लैण्ड) - * यह सबसे बड़ी लार ग्रंथि है  * यह कानों के नीचे एक एक की संख्या में पाई जाती है  * ये मुख्य रूप से स्टार्च को पचाने वाले एंजाइम, एमाइलेज (जिसे टाइलिन भी कहा जाता है), से भरपूर एक तरल ...
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