लार (Saliva) और लार ग्रंथियां (Saliva Enzymes)
लार ग्रंथि
- लार को मेन्डुयूला अब्लोगेटा व पोन्स वैरोलाई ( मस्तिष्क के भाग ) नियंत्रित करते है
- लार ग्रंथि लाला रस का स्त्रवन करती है
- लार ग्रंथि तीन प्रकार की होती है।
- कर्ण पुर्व ग्रन्थि ( पैरोटीड ग्लैण्ड)
- अधोजंम्भ ग्रन्थि ( सबमेडीबुलर ग्लैण्ड)
- अधोजिह्वा ग्रन्थि ( सब लिग्युअल ग्लैण्ड)
1. कर्ण पुर्व ग्रन्थि ( पैरोटीड ग्लैण्ड) -
* यह सबसे बड़ी लार ग्रंथि है
* यह कानों के नीचे एक एक की संख्या में पाई जाती है
* ये मुख्य रूप से स्टार्च को पचाने वाले एंजाइम, एमाइलेज (जिसे टाइलिन भी कहा जाता है), से भरपूर एक तरल पदार्थ का उत्पादन करती हैं।
* यह ग्रंथि मम्स रोग में प्रभावित होती है
Note:- मम्स रोग एक वायरस जनित रोग है जो पैरामाइक्सो वायरस के कारण होता है इसे गलसुआ रोग भी कहते हैं
2. अधोजंम्भ ग्रन्थि ( सबमेडीबुलर ग्लैण्ड)-
* यह ग्रन्थि 70% लार का स्त्रवन करती है।
* यह निचले जबड़े के मध्य मैक्सिला अस्थि के दोनों और एक-एक की संख्या में पाई जाती है।
* ये पैरोटिड ग्रंथियों की तुलना में अधिक श्लेष्म (mucus) और एमाइलेज दोनों का मिश्रण उत्पन्न करती हैं।
3. अधोजिह्वा ग्रन्थि ( सब लिग्युअल ग्लैण्ड)-
* यह सबसे छोटी ग्रंथि है
* यह जीभ के दोनों और एक-एक की संख्या में पाई जाती है
इन बड़ी ग्रंथियों के अलावा, पूरे मुंह के अंदरूनी हिस्से में सैकड़ों छोटी लार ग्रंथियां होती हैं जो लगातार लार का स्राव करती रहती हैं, जिससे मुंह हमेशा नम बना रहता है।
लार के प्रमुख कार्य: पाचन और मौखिक स्वास्थ्य की कुंजी
लार के कार्य भोजन को निगलने में मदद करने से कहीं अधिक हैं:
भोजन का पाचन: लार में मौजूद एमाइलेज एंजाइम जटिल कार्बोहाइड्रेट को सरल शर्करा में तोड़ना शुरू कर देता है। हालांकि पाचन मुख्य रूप से पेट और छोटी आंत में होता है, लेकिन इसकी शुरुआत मुंह में ही हो जाती है।
भोजन को निगलने में मदद: लार भोजन को गीला और चिकना बनाती है, जिससे इसे आसानी से निगला जा सकता है और गले में खराश नहीं होती।
मौखिक स्वास्थ्य की रक्षा: लार मुंह में एसिड के स्तर को संतुलित करने में मदद करती है, जिससे दांतों की सड़न और कैविटी को रोकने में मदद मिलती है। यह बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने वाले एंजाइम और प्रोटीन भी प्रदान करती है।
स्वाद का अनुभव: लार भोजन में मौजूद स्वाद अणुओं को भंग करने में मदद करती है, जिससे वे स्वाद कलिकाओं तक पहुंच पाते हैं और हम विभिन्न स्वादों का अनुभव कर पाते हैं।
दांतों का पुनर्खनिजीकरण: लार में कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे खनिज होते हैं जो दांतों के इनेमल को मजबूत बनाने और छोटे-मोटे नुकसान को ठीक करने में मदद करते हैं।
बोलने में मदद: लार मुंह को नम और चिकना रखती है, जिससे बोलने में आसानी होती है।
लार की कमी और इसके प्रभाव
शरीर में लार की कमी को 'जेरोस्टोमिया' या 'ड्राई माउथ' कहा जाता है। यह तनाव, निर्जलीकरण, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, विकिरण चिकित्सा या कुछ बीमारियों के कारण हो सकता है। लार की कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
दांतों की सड़न और कैविटी में वृद्धि: लार की रक्षात्मक भूमिका के बिना, दांतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
भोजन निगलने और बोलने में कठिनाई: मुंह के सूखने से ये दैनिक गतिविधियां मुश्किल हो सकती हैं।
स्वाद की कमी: स्वाद कलिकाएं ठीक से काम नहीं कर पातीं।
मुंह में संक्रमण का खतरा: लार में मौजूद रोगाणुरोधी तत्वों की कमी से संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
मुंह के छाले और अन्य समस्याएं: शुष्क मुंह में छाले और दर्द हो सकता है।
लार
- लार में 99% जल व 1% एंजाइम पाए जाते हैं
- लार (Saliva) में मुख्य रूप से तीन प्रकार के एंजाइम पाए जाते हैं:
1. लार ऐमाइलेज ( टायलिन)
* यह स्टार्च (Carbohydrates) को माल्टोज़ में तोड़ता है।
* पाचन की प्रक्रिया का पहला एंजाइम यही होता है।
2. लाइसोज़ाइम (Lysozyme)
* यह एक प्रतिजैविक (Antibacterial) एंजाइम है।
* यह एंजाइम हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है
3. लिपेज (Lingual Lipase / Salivary Lipase)
* यह वसा (Fat) को तोड़ने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू करता है।
* खासकर शिशुओं में यह अधिक सक्रिय होता है।
* लाइपेज एंजाइम का मुख्य कार्य वसा (लिपिड) का पाचन करना है
निष्कर्ष
लार केवल एक तरल पदार्थ नहीं है, बल्कि हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमारे पाचन, मौखिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लार ग्रंथियां लार का उत्पादन करके इन सभी कार्यों को संभव बनाती हैं। लार की कमी से होने वाली समस्याओं को समझने और मौखिक स्वच्छता का ध्यान रखने से हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। लार के महत्व को पहचानना और इसे नजरअंदाज न करना हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

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