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भारत के भौतिक प्रदेश

भारत के भू-आकृतिक प्रदेश

विस्तृत एवं परीक्षा उपयोगी नोट्स

भारत प्राकृतिक विविधताओं वाला देश है। यहाँ पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान तथा द्वीप समूह सभी प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। 

भारत के भू-आकृतिक प्रदेश

📑 Table of Contents

    भारत के भू-आकृतिक प्रदेशों का प्रतिशत

    भू-आकृतिक भाग प्रतिशत क्षेत्र
    पर्वतीय क्षेत्र 10.6%
    पहाड़ी क्षेत्र 18.5%
    पठारी क्षेत्र 27.7%
    विशाल मैदान 43.2%

    भारत के चार प्रमुख भू-आकृतिक प्रदेश

    1. उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र
    2. उत्तर भारत का विशाल मैदान
    3. प्रायद्वीपीय पठारी भाग
    4. तटीय मैदान एवं द्वीप समूह

    1. उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र

    ​भारत के उत्तरी छोर पर स्थित पर्वतीय प्रदेश एक विशाल प्राकृतिक दीवार के रूप में विद्यमान है, जो पश्चिम में जम्मू-कश्मीर के बर्फीले क्षेत्रों से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों तक लगभग 2500 किलोमीटर की लंबाई में विस्तृत है। 

    इस पर्वतमाला की संरचना अत्यंत रोचक है क्योंकि इसकी चौड़ाई पश्चिमी भाग में 500 किलोमीटर तक है, जबकि पूर्वी भाग में यह घटकर मात्र 200 किलोमीटर रह जाती है। इसका मुख्य कारण पूर्व की ओर दबाव-बल का अधिक होना है, जिससे इसकी ऊंचाई तो बढ़ी लेकिन चौड़ाई कम हो गई।

    हिमालय का आकार एक विशाल धनुष या तलवार की भांति प्रतीत होता है, जो सिंधु नदी के मोड़ से शुरू होकर ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ तक फैला हुआ है।

    इसका निर्माण यूरेशियन और इंडिक प्लेटों के शक्तिशाली टकराव का परिणाम है। इस पर्वतमाला के जन्म से पूर्व यहाँ टेथिस नाम का एक विशाल सागर हिलोरे मारता था, जिसमें जमा हुए मलबे और अवसादों पर जब दबाव पड़ा, तो वह ऊपर उठकर हिमालय बन गया। यही कारण है कि टेथिस सागर को आज भी ‘हिमालय का गर्भ-गृह’ की संज्ञा दी जाती है। 

    यह विशाल प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बर्फाच्छादित क्षेत्र माना जाता है।

    हिमालय की प्रमुख श्रेणियाँ

    • ट्रांस हिमालय
    • वृहद हिमालय (हिमाद्रि)
    • लघु हिमालय (हिमाचल)
    • शिवालिक हिमालय

    1. ट्रांस हिमालय

    सबसे उत्तर में स्थित ट्रांस हिमालय क्षेत्र को तिब्बती या टेथिस हिमालय के नाम से भी संबोधित किया जाता है। 

    लगभग 965 किलोमीटर की लंबाई में फैला यह क्षेत्र मुख्य हिमालय से भी प्राचीन है, क्योंकि इसका निर्माण हिमालय के उत्थान से काफी पहले यूरेशियन प्लेट के हिस्से के रूप में हो चुका था। 

    यहाँ की औसत ऊंचाई 3100 से 3700 मीटर के मध्य रहती है, लेकिन अत्यधिक ठंड और शुष्क जलवायु के कारण यहाँ वनस्पतियों का सर्वथा अभाव पाया जाता है। 

    इस क्षेत्र के अंतर्गत काराकोरम, लद्दाख, जास्कर और कैलाश जैसी महत्वपूर्ण पर्वत श्रेणियां आती हैं। 

    भारत की सर्वोच्च पर्वत चोटी K2 (गॉडविन आस्टिन) इसी काराकोरम श्रेणी का गौरव है। 

    यहाँ सियाचिन और बाल्टोरा जैसे विशाल ग्लेशियर पाए जाते हैं। 

    लद्दाख श्रेणी में स्थित राकापोषी शिखर अपनी तीव्र ढलान के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है। 

    सिंधु नदी इसी क्षेत्र में लद्दाख और जास्कर श्रेणियों के मध्य अपनी घाटी बनाती हुई प्रवाहित होती है, जिसके दाहिने तट पर लद्दाख की राजधानी लेह स्थित है।

    उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र

    प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ

    • काराकोरम
    • लद्दाख
    • जास्कर
    • कैलाश

    काराकोरम पर्वत श्रेणी

    काराकोरम ट्रांस हिमालय की सबसे उत्तरी पर्वत श्रेणी है। भारत की सबसे ऊँची चोटी K2 (गॉडविन ऑस्टिन) इसी पर्वत श्रेणी में स्थित है।

    K2 की ऊँचाई लगभग 8611 मीटर है।

    काराकोरम के प्रमुख ग्लेशियर

    • सियाचिन ग्लेशियर
    • बाल्टोरो ग्लेशियर
    • बियाफो ग्लेशियर
    • हिस्पर ग्लेशियर

    सियाचिन ग्लेशियर विश्व का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र माना जाता है।

    लद्दाख पर्वत श्रेणी

    काराकोरम के दक्षिण में लद्दाख पर्वत श्रेणी स्थित है। इसके उत्तर में श्योक नदी तथा दक्षिण में सिंधु नदी बहती है।

    लेह नगर सिंधु नदी के किनारे स्थित है।

    2. वृहद हिमालय (हिमाद्रि)

    यह हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी है। इसे महान हिमालय तथा सर्वोच्च हिमालय भी कहा जाता है।

    दक्षिण में वृहद हिमालय की गगनचुंबी दीवार खड़ी है, जिसे महान हिमालय या हिमाद्रि भी कहा जाता है। 

    2500 किलोमीटर लंबी इस श्रेणी की औसत ऊंचाई 6100 मीटर है, जो इसे दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रेणी बनाती है। 

    यह श्रेणी पश्चिम में नंगा पर्वत से शुरू होकर पूर्व में नामचा बरवा तक एक अटूट श्रृंखला के रूप में फैली है। 

    विश्व के सर्वोच्च शिखर जैसे माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू और धौलागिरी इसी श्रेणी की शोभा बढ़ाते हैं। 

    नेपाल में स्थित एवरेस्ट को स्थानीय भाषा में ‘चोमोलुंगमा’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है पर्वतों की रानी। 

    यहाँ गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों के उद्गम स्थल गंगोत्री और यमुनोत्री ग्लेशियर स्थित हैं। 

    पर्वत चोटी ऊँचाई स्थान
    माउंट एवरेस्ट 8848.86 मीटर नेपाल
    K2 8611 मीटर काराकोरम
    कंचनजंघा 8586 मीटर सिक्किम
    मकालू 8485 मीटर नेपाल
    धौलागिरि 8167 मीटर नेपाल

    महत्वपूर्ण तथ्य

    • माउंट एवरेस्ट पूरी दुनिया की सबसे ऊँची चोटी है।
    • भारत की सबसे ऊँची हिमालयी चोटी कंचनजंघा है।
    • एवरेस्ट को तिब्बती भाषा में चोमोलुंगमा कहा जाता है।
    • नामचा बरवा हिमालय की पूर्वी सीमा है।
    • नंगा पर्वत हिमालय की पश्चिमी सीमा है।

    प्रमुख ग्लेशियर

    • गंगोत्री ग्लेशियर
    • यमुनोत्री ग्लेशियर
    • पिंडारी ग्लेशियर
    • मिलम ग्लेशियर

    गंगोत्री ग्लेशियर से गंगा नदी निकलती है तथा यमुनोत्री ग्लेशियर से यमुना नदी निकलती है।

    3. लघु हिमालय (हिमाचल)

    यह वृहद हिमालय तथा शिवालिक के बीच स्थित है। इसकी जलवायु शीतोष्ण होती है इसलिए यहाँ अनेक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल विकसित हुए हैं।

    मध्य भाग में स्थित लघु या मध्य हिमालय श्रेणी अपनी मनोरम घाटियों और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण के लिए विश्वविख्यात है। 

    पीर पंजाल इसकी सबसे लंबी और प्रमुख श्रेणी है, जहाँ प्रसिद्ध बनिहाल दर्रा स्थित है जो जम्मू को श्रीनगर से जोड़ता है। 

    इस क्षेत्र में मिलने वाले छोटे घास के मैदानों को कश्मीर में ‘मर्ग’ जैसे गुलमर्ग और सोनमर्ग कहा जाता है, जबकि उत्तराखंड में इन्हें ‘बुग्याल’ या ‘पयार’ के नाम से जाना जाता है। 

    यहाँ की जलवायु इतनी सुखद है कि शिमला, मसूरी, नैनीताल और दार्जिलिंग जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल इसी श्रेणी की गोद में बसे हैं। 

    वृहद और लघु हिमालय के बीच में ही कश्मीर घाटी और काठमांडू घाटी जैसी सुंदर समतल घाटियां पाई जाती हैं, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं।

    प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ

    • पीर पंजाल
    • धौलाधर
    • महाभारत श्रेणी
    • नाग टिब्बा श्रेणी

    महत्वपूर्ण दर्रे

    • बनिहाल दर्रा
    • पीर पंजाल दर्रा

    लघु हिमालय के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

    राज्य प्रमुख पर्यटन स्थल
    जम्मू-कश्मीर गुलमर्ग, सोनमर्ग
    हिमाचल प्रदेश शिमला, मनाली, डलहौजी
    उत्तराखंड मसूरी, नैनीताल, रानीखेत
    पश्चिम बंगाल दार्जिलिंग

    मर्ग और बुग्याल

    जम्मू-कश्मीर में घास के मैदानों को मर्ग कहा जाता है।

    उत्तराखंड में घास के मैदानों को बुग्याल कहा जाता है।

    उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र

    4. शिवालिक हिमालय

    शिवालिक हिमालय को उप हिमालय या बाह्य हिमालय भी कहा जाता है। यह हिमालय की सबसे नवीन पर्वत श्रेणी है।

    सबसे दक्षिण में हिमालय का सबसे नवीन हिस्सा शिवालिक श्रेणी स्थित है, जिसे उप-हिमालय भी कहा जाता है। यह श्रेणी अभी भी अपनी निर्माण अवस्था में है, इसलिए यहाँ कंकड़, पत्थर और मिट्टी की मोटी परतें पाई जाती हैं। 

    शिवालिक और लघु हिमालय के बीच की घाटियों को पश्चिम में ‘दून’ (जैसे देहरादून) और पूर्व में ‘द्वार’ (जैसे हरिद्वार) कहा जाता है। 

    शिवालिक का सबसे निचला हिस्सा ‘तराई’ कहलाता है, जो घने जंगलों और दलदली भूमि से ढका हुआ है। 

    नदियों के बहाव के आधार पर भी हिमालय को चार प्रादेशिक भागों—पंजाब, कुमायूं, नेपाल और असम हिमालय में बांटा गया है, जिनमें नेपाल हिमालय सबसे लंबा और असम हिमालय सबसे पूर्वी भाग माना जाता है।

    यह संपूर्ण पर्वत तंत्र भारत के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच और नदियों के अक्षय भंडार के रूप में कार्य करता है।

    दून घाटियाँ

    • देहरादून
    • कोटलीदून
    • पटलीदून

    भाबर क्षेत्र

    शिवालिक के दक्षिण में कंकड़-पत्थरों से बना क्षेत्र भाबर कहलाता है। यहाँ नदियाँ भूमि के अंदर चली जाती हैं।

    तराई क्षेत्र

    भाबर के दक्षिण में दलदली एवं वनाच्छादित क्षेत्र तराई कहलाता है।

    2. उत्तर का विशाल मैदान

    उत्तर का विशाल मैदान हिमालय पर्वतमाला और प्रायद्वीपीय भारत के बीच स्थित एक अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र है। 

    इसका निर्माण क्वार्टनरी काल के प्लाइस्टोसीन और होलोसीन युग में नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी के जमाव से हुआ। 

    गंगा, यमुना, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, सोन और चम्बल जैसी नदियों ने इस मैदान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान भी कहा जाता है। 

    यह मैदान लगभग 3200 किमी लंबाई में फैला है और लगभग 7.5 लाख वर्ग किमी क्षेत्र को घेरता है। इसकी चौड़ाई पश्चिम में अधिक तथा पूर्व में कम है।

    अंबाला के आसपास का क्षेत्र जल-विभाजक के रूप में कार्य करता है, क्योंकि यहां से पूर्व की नदियाँ बंगाल की खाड़ी और पश्चिम की नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं। 

    जलोढ़ मिट्टी की अधिकता के कारण यह क्षेत्र कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है, इसलिए इसे भारत का “अन्न भंडार” भी कहा जाता है।

    उत्तर के विशाल मैदान के प्रमुख भाग

    1. भाबर प्रदेश
    2. तराई प्रदेश
    3. बांगर प्रदेश
    4. खादर प्रदेश

    1. भाबर प्रदेश

    भाबर प्रदेश शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में स्थित संकीर्ण पट्टी है। इसका विस्तार सिंधु नदी से लेकर तीस्ता नदी तक है। यहाँ हिमालय से उतरने वाली नदियाँ बड़े कंकड़-पत्थर और बजरी जमा करती हैं।

    भूमि अधिक छिद्रयुक्त होने के कारण यहाँ नदियों का जल भूमि के अंदर समा जाता है। इसलिए कई नदियाँ इस क्षेत्र में भूमिगत हो जाती हैं।

    2. तराई प्रदेश

    तराई प्रदेश भाबर क्षेत्र के दक्षिण में स्थित है। यहाँ की मिट्टी महीन बालू, चिकनी मिट्टी तथा छोटे कंकड़ों से बनी होती है। भाबर क्षेत्र में भूमिगत हुई नदियाँ यहाँ पुनः धरातल पर दिखाई देती हैं।

    यह क्षेत्र अत्यधिक उपजाऊ है। पहले यहाँ घने वन पाए जाते थे, लेकिन अब अधिकांश भाग कृषि भूमि में बदल चुका है। यहाँ धान, गन्ना तथा अन्य फसलों की खेती अधिक की जाती है

    3. बांगर प्रदेश

    बांगर प्रदेश प्राचीन जलोढ़ मिट्टी से निर्मित ऊँचा मैदान है। यहाँ सामान्यतः बाढ़ का पानी नहीं पहुँचता। भूमि में कंकड़-पत्थरों की अधिकता होने के कारण यह क्षेत्र खादर की तुलना में कम उपजाऊ माना जाता है।

    4. खादर प्रदेश

    खादर प्रदेश नवीन जलोढ़ मिट्टी से बना निम्न क्षेत्र है। यहाँ लगभग प्रत्येक वर्ष बाढ़ आती है, जिससे नई उपजाऊ मिट्टी का निक्षेप होता रहता है। इसलिए यह क्षेत्र कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

    गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा इसका प्रमुख उदाहरण है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल के नदी तटीय क्षेत्रों में खादर मिट्टी अधिक मात्रा में पाई जाती है।

    उत्तर का विशाल मैदान

    उत्तर के विशाल मैदान के उपविभाग

    पंजाब-हरियाणा का मैदान

    यह क्षेत्र मुख्यतः सतलज, रावी और व्यास नदियों के बीच स्थित है। यहाँ अनेक दोआब पाए जाते हैं।

    Note:- दो नदियों के बीच स्थित भूमि को दोआब कहते हैं।

    प्रमुख दोआब 

    • सिंधु और झेलम के बीच — सिंध सागर दोआब
    • झेलम और चेनाब के बीच — छाज दोआब
    • चेनाब और रावी के बीच — रेचना दोआब
    • रावी और व्यास के बीच — बारी दोआब
    • व्यास और सतलज के बीच — बिस्त दोआब

    3. प्रायद्वीपीय पठार

    प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे प्राचीन भौतिक प्रदेश है। यह गोंडवाना भूमि का भाग माना जाता है तथा कठोर आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों से निर्मित है। 

    इसका आकार त्रिभुजाकार है तथा यह लगभग 16 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।

    इस पठार की औसत ऊँचाई लगभग 600 से 900 मीटर है।

    प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ

    पश्चिमी घाट

    पश्चिमी घाट पर्वतमाला महाराष्ट्र से तमिलनाडु तक फैली हुई है। इसे “सह्याद्रि पर्वत” भी कहा जाता है। इसका पश्चिमी ढाल तीव्र तथा पूर्वी ढाल मंद है।

    यह पर्वतमाला अरब सागर के समानांतर स्थित है। गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा तुंगभद्रा जैसी महत्वपूर्ण नदियाँ इसी क्षेत्र से निकलती हैं।

    पश्चिमी घाट की प्रमुख चोटियाँ—

    • अनामुडी (2695 मीटर) — दक्षिण भारत की सर्वोच्च चोटी
    • कलसुबाई (1646 मीटर)
    • महाबलेश्वर क्षेत्र की ऊँची पहाड़ियाँ

    पूर्वी घाट

    पूर्वी घाट महानदी घाटी से लेकर नीलगिरि पहाड़ियों तक फैला हुआ है। यह पर्वतमाला पश्चिमी घाट की तुलना में कम ऊंची तथा अधिक खंडित है।

    महेंद्रगिरि इसकी प्रमुख चोटी है। यह पर्वतमाला कई छोटी पहाड़ियों जैसे शेवरॉय पहाड़ियाँ, जावादी पहाड़ियाँ, नल्लमाला पहाड़ियाँ में विभाजित है।

    अरावली पर्वतमाला

    अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन अवशिष्ट पर्वत श्रेणियों में से एक है। इसका विस्तार गुजरात से दिल्ली तक लगभग 850 किलोमीटर तक है।

    गुरु शिखर (1722 मीटर) इसकी सर्वोच्च चोटी है, जो राजस्थान के माउंट आबू में स्थित है। प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिर भी इसी क्षेत्र में स्थित है।

    प्रमुख दर्रे

    हल्दीघाटी - राजसमंद

    देसूरी दर्रा - पाली

    सोमेश्वर दर्रा - पाली

    परवेरिया दर्रा- सिरोही

    विंध्य और सतपुड़ा पर्वत

    विंध्य पर्वतमाला मुख्यतः परतदार चट्टानों से बनी है। इसके कई भागों में लाल बलुआ पत्थर पाया जाता है।

    सतपुड़ा पर्वतमाला नर्मदा और ताप्ती नदियों के बीच स्थित एक ब्लॉक पर्वत है। धूपगढ़ इसकी सर्वोच्च चोटी है, जो मध्य प्रदेश के पचमढ़ी क्षेत्र में स्थित है।

    दक्कन का पठार

    दक्कन का पठार भारत का सबसे विस्तृत पठारी क्षेत्र है। यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना तथा तमिलनाडु के भागों में फैला हुआ है।

    यह क्षेत्र काली मिट्टी के लिए प्रसिद्ध है, जो कपास की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। यहां लौह अयस्क, मैंगनीज तथा बॉक्साइट जैसे खनिज भी पाए जाते हैं।

    4. तटीय मैदान

    भारत का तटीय मैदान प्रायद्वीपीय पठार तथा समुद्र के बीच स्थित है। भारत की समुद्री तटरेखा लगभग 7516 किलोमीटर लंबी है। तटीय मैदानों को दो भागों में बाँटा जाता है—

    1. पश्चिमी तटीय मैदान

    2. पूर्वी तटीय मैदान

    पश्चिमी तटीय मैदान

    पश्चिमी तटीय मैदान कच्छ की खाड़ी से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इसकी औसत चौड़ाई लगभग 64 किलोमीटर है।

    नर्मदा और ताप्ती नदियों के मुहानों के पास इसकी चौड़ाई अधिक हो जाती है। यहां की नदियाँ छोटी और तीव्र प्रवाह वाली हैं तथा अधिकांश नदियाँ डेल्टा के स्थान पर ज्वारीय मुहाने बनाती हैं।

    पश्चिमी तटीय मैदान के प्रमुख तट

    पश्चिमी तटीय मैदान कच्छ की खाड़ी से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इसकी चौड़ाई अपेक्षाकृत कम है। पश्चिमी तट को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है 

    1. कोंकण तट

    कोंकण तट का विस्तार महाराष्ट्र के मुंबई क्षेत्र से लेकर गोवा तक पाया जाता है। यह तट संकरा तथा चट्टानी है। यहां अनेक छोटी एवं तीव्रगामी नदियाँ बहती हैं। मुंबई भारत का प्रमुख प्राकृतिक बंदरगाह इसी तट पर स्थित है।

    2. कन्नड़ तट (कनारा तट)

    यह तट गोवा से लेकर कर्नाटक के मंगलुरु क्षेत्र तक फैला हुआ है। इसे उत्तर कन्नड़ और दक्षिण कन्नड़ तट भी कहा जाता है। यहां नारियल, सुपारी तथा मसालों की खेती अधिक होती है।

    3. मालाबार तट

    मालाबार तट का विस्तार केरल से कन्याकुमारी तक है। यह पश्चिमी तट का सबसे आर्द्र क्षेत्र माना जाता है। यहां अनेक लैगून झीलें तथा पश्चजल (Backwaters) पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में “कयाल” कहा जाता है। कोच्चि बंदरगाह इसी तट पर स्थित है।

    पूर्वी तटीय मैदान

    पूर्वी तटीय मैदान स्वर्णरेखा नदी से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। यह पश्चिमी तटीय मैदान की तुलना में अधिक चौड़ा है।

    गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियाँ यहां विशाल डेल्टा बनाती हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख लैगून झीलें— चिल्का झील ,पुलीकट झील आदि 

    चिल्का झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है। 

    इसे मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है—

    1. उत्तरी सरकार तट

    उत्तरी सरकार तट का विस्तार पश्चिम बंगाल के दक्षिणी भाग से लेकर आंध्र प्रदेश तक पाया जाता है। महानदी, गोदावरी और कृष्णा नदियाँ इसी क्षेत्र में विशाल डेल्टा बनाती हैं। यह क्षेत्र कृषि की दृष्टि से अत्यंत उपजाऊ है।

    2. कोरोमंडल तट

    कोरोमंडल तट का विस्तार आंध्र प्रदेश से तमिलनाडु के कन्याकुमारी क्षेत्र तक है। कावेरी नदी का डेल्टा इसी तट पर स्थित है। चेन्नई का प्रसिद्ध समुद्री तट “मरीना बीच” इसी क्षेत्र में आता है।

    भारत के तटीय मैदान ओर द्वीप समूह

    5. द्वीप समूह

    भारत में लगभग 1000 से अधिक छोटे-बड़े द्वीप पाए जाते हैं। इन्हें मुख्यतः दो भागों में बांटा गया है—

    1. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह
    2. लक्षद्वीप द्वीप समूह

    अंडमान-निकोबार द्वीप समूह

    यह द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यहां लगभग 350 द्वीप हैं, जिनमें से केवल कुछ द्वीपों पर ही मानव निवास है।

    सैडल पीक इसकी सर्वोच्च चोटी है। बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।

    भारत का दक्षिणतम बिंदु “इंदिरा प्वाइंट” ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है। 10 डिग्री चैनल अंडमान और निकोबार द्वीप समूहों को अलग करता है।

    लक्षद्वीप द्वीप समूह

    लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित प्रवाल द्वीपों का समूह है। यहां कुल 36 द्वीप हैं, जिनमें से केवल 10 पर मानव निवास है।

    अगत्ती द्वीप पर हवाई अड्डा स्थित है तथा एंड्रोट यहां का सबसे बड़ा द्वीप है। यहां की प्रमुख भाषा मलयालम है।

    प्रमुख जलडमरूमध्य एवं चैनल

    • ग्रेट चैनल — इंदिरा प्वाइंट और इंडोनेशिया के मध्य स्थित है 
    • 10 डिग्री चैनल — लिटिल अंडमान और कार निकोबार के मध्य स्थित है 
    • 9 डिग्री चैनल — मिनिकॉय और लक्षद्वीप के बीच मध्य स्थित हैं 
    • आदम ब्रिज — भारत और श्रीलंका के मध्य 
    • डंकन पास — दक्षिण अंडमान और लिटिल अंडमान के मध्य 
    • कोको स्ट्रेट — कोको द्वीप और अंडमान के मध्य

    परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

    • हिमालय विश्व की नवीन मोड़दार पर्वतमाला है।
    • भारत की सबसे ऊँची चोटी K2 है।
    • भारत की सबसे ऊँची हिमालयी चोटी कंचनजंघा है।
    • दक्कन पठार भारत का सबसे प्राचीन भू-भाग है।
    • अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला है।
    • सियाचिन विश्व का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है।
    • लक्षद्वीप प्रवाल द्वीप हैं।
    • बैरेन द्वीप भारत का सक्रिय ज्वालामुखी है।

    निष्कर्ष

    भारत का भौतिक स्वरूप अत्यंत विविध और समृद्ध है। हिमालय के ऊँचे पर्वत, उपजाऊ मैदान, प्राचीन पठार, विस्तृत तटीय क्षेत्र तथा द्वीप समूह भारत की प्राकृतिक विशेषताओं को अद्वितीय बनाते हैं।

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    Electric Charge and Electricity Notes in Hindi परिचय: भौतिक विज्ञान में विद्युत (Electricity) और आवेश (Charge) बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक हैं। यह SSC, रेलवे, NTPC, ALP और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है। ⚡ आवेश (Electric Charge) किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण उसमें इलेक्ट्रॉन प्रवाह से विद्युतीय या चुंबकीय गुण आ जाता है, उसे आवेश कहते हैं। इसे q से दर्शाते हैं। 📐 आवेश का सूत्र q = ne q = आवेश n = इलेक्ट्रॉनों की संख्या e = एक इलेक्ट्रॉन का आवेश 📏 मात्रक (Unit) SI मात्रक = कूलम्ब (Coulomb) अन्य मात्रक = फैराडे 1 फैराडे = 96485 कूलम्ब 🔍 महत्वपूर्ण तथ्य एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश = -1.602 × 10 -19 C 1 कूलम्ब में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 6.25 × 10 18 समान आवेश → प्रतिकर्षण असमान आवेश → आकर्षण धनात्मक व ऋणात्मक आवेश की खोज → बेंजामिन फ्रैंकलिन ⚙️ इलेक्ट्रॉन प्रवाह इलेक्ट्रॉन हमेशा ऋणात्मक से धनात्मक की ओर प्रवाहित होते हैं (धारा की विपरीत दिशा में)। Read more :- ध्वनि तरंग सरल भाषा में: प्रकार, लक्षण और उपयोग ...

    Heat and Temperature Notes in Hindi

    Heat and Temperature Heat and Temperature Notes in Hindi – इस पोस्ट में ऊष्मा और ताप से जुड़े सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स जैसे संवेदनशील ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा, ऊष्मीय प्रसार, तापमान मापन, और महत्वपूर्ण प्रश्न सरल भाषा में समझाए गए हैं। यह नोट्स SSC, Railway, REET, UPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बहुत उपयोगी हैं। 📑 Table of Contents ताप क्या है (Temperature) कोई वस्तु कितनी गर्म या ठडी है की माप को ताप कहते है। ताप किसी वस्तु की ऊष्मीय अवस्था का सूचक है। ताप वस्तु का ठण्डी है या गर्म उसका डिग्री माप होता है। ऊष्मा का प्रवाह उच्च ताप से निम्न ताप की ओर होता है। ताप का मापन थर्मामीटर एवं पायरोमीटर द्वारा किया जाता है तापमान क्या होता है (Temperature Measurement) वस्तु के ताप की माप को तापमान कहते है। तापमापी में उपस्थित पारा (द्रव धातु) में ऊष्मीय प्रसार (ऊष्मा पाकर फैलने) का गुण पाया जाता है। पारे के विस्तार (फैलना) तथा संकुचन (सिकुड़ना) के द्वारा ताप को मापा जाता है। जल का हिमांक बिंदु 0°C इसे न्यूनतम बिन्दु भी कहते है। जल का क्वथनांक बिन्दु 100°C इसे उच...
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